मंगलवार, 20 सितंबर 2016

मै चाहता हूँ कि हमारे सारे मित्र
अपने मित्रों को हिन्दी या अङ्ग्रेजी के बदले संस्कृत के वाक्य प्रयोग करने हेतु प्रेरित करेँ-
  • भो शिष्य उत्तिष्ठ प्रातःकालो जातः ।
  • हे शिष्य ! उठ, सवेरा हुआ ।
  • उत्तिष्ठामि ।
  • उठता हूँ ।
  • अन्ये सर्वे विद्यार्थिन उत्थिता न वा ?
  • और सब विद्यार्थी उठे वा नहीं ?
  • अधुना तु नोत्थिताः खलु
  • अभी तो नहीं उठे हैं ।
  • तानपि सर्वानुत्थापय
  • उन सब को भी उठा दे ।
  • सर्व उत्थापिताः
  • सब उठा दिये ।
  • सम्प्रत्यस्माभिः किं कर्त्तव्यम् ?
  • इस समय हमको क्या करना चाहिये ?
  • आवश्यकं शौचादिकं कृत्वा सन्ध्यावन्दनम् ।
  • आवश्यक शरीरशुद्धि करके सन्ध्योपासना ।
  • आवश्यकं कृत्वा सन्ध्योपासिता‍ऽतः परमस्माभिः किं करणीयम् ? । 
  • आवश्यक कर्म करके सन्ध्योपासन कर लिया । इसके आगे हमको क्या करना चाहिये ?
  • अग्निहोत्रं विधाय पठत ।
  • अग्निहोत्र करके पढ़ो ।
  • पूर्वं किं पठनीयम ?
  • पहिले क्या पढ़ना चाहिये ?
  • वर्णोच्चारणशिक्षामधीध्वम् ।
  • वर्णोच्चारणशिक्षा को पढ़ो ।
  • पश्चात्किमध्येतव्यम् ?
  • पीछे क्या पढ़ना चाहिये ?
  • किंचित्संस्कृतोक्तिबोधः क्रियताम् ।
  • कुछ संस्कृत बोलने का ज्ञान किया जाय ।
  • पुनः किमभ्यसनीयम् ?
  • फिर किसका अभ्यास करना चाहिये ?
  • यथायोग्यव्यवहारानुष्ठानाय प्रयुतध्वम् ।
  • यथोचित व्यवहार करने के लिये प्रयत्न करो ।
  • कुतोऽनुचितव्यवहार कर्तुर्विद्यैव न जायते ।
  • क्योंकि उल्टे व्यवहार करनेहारे को विद्या ही नहीं होती ।
  • को विद्वान् भवितुर्महति ?
  • कौन मनुष्य विद्वान् होने के योग्य होता है ?
  • यः सदाचारी प्राज्ञः पुरुषार्थी भवेत् ।
  • जो सत्याचरणशील, बुद्धिमान्, पुरुषार्थी हो ।
  • कीदृशादाचार्याधीत्य पण्डितो भवितुं शक्नोति ?
  • कैसे आचार्य से पढ़ के पण्डित हो सकता है ?
  • अनूचानतः । पूर्ण विद्वान वक्ता से ।
  • अथ किमध्यापयिष्यते भवता ?
  • अब आप इसके अनन्तर हमको क्या पढ़ाइयेगा ?
  • अष्टाध्यायी महाभाष्यम् ।
  • अष्टाध्यायी और महाभाष्य ।
  • किमनेन पठितेन भविष्यति ?
  • इसके पढ़ने से क्या होगा ?
  • शब्दार्थसम्बन्धविज्ञानम् ।
  • शब्द अर्थ और सम्बन्धों का यथार्थबोध ।
  • पुनः क्रमेण किं किमध्येतव्यम् ? 
  • फिर क्रम से क्या-क्या पढ़ना चाहिये ?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें